उद्यान के विशेष आकर्षण अंग हिन्दी में Special Attractions of the Garden in hindi

उद्यान के विशेष आकर्षण अंग हिन्दी में Special Attractions of the Garden in hindi


उद्यान की शोभा उद्यान के विशेष आकर्षण अंगों द्वारा होती है। इन अंगों के द्वारा उद्यान अधूरा होता है। नीचे दिए गए उद्यान के विशेष आकर्षण अंग उद्यान की शोभा अत्यधिक बढ़ाते हैं।


उद्यान के विशेष आकर्षण अंग हिन्दी में Special Attractions of the Garden in hindi

उद्यान के विशेष आकर्षण अंग हिन्दी में

उद्यान के विशेष आकर्षण अंग निम्नलिखित हैं -

(1) टॉपियरी ( Topiary )

शोभादार झाड़ियों को काट-छांट कर या सधाई कर विभिन्न आकार देने को टॉपियरी कहते हैं। झाड़ियों के ये आकार बैल, हाथी, आदमी, पक्षी आदि के हो सकते हैं। टॉपियरी के लिए ऐसे पौधे लगाए जाते हैं जो शीघ्रता से बढ़ते हैं।

विभिन्न आकार में साधे जा सकते हैं और सदाबहार होते हैं, जैसे - मधुकामिनी, विलायती इमली, क्लोरोडेन्ड्रॉन, अकेशिया माडेस्टा, दुरन्टा आदि। जिस आकार में पौधों को बनाना हो उसका लोहे की तार या जाली का ढांचा तैयार किया जाता है और इसमें पौधों को बढ़ने दिया जाता है।

समय-समय पर ढांचे के अनुरूप काट-छांट की जाती है। टॉपियरी बनाने के लिए पौधों की काट-छांट बड़ी सावधानी पूर्वक की जानी चाहिए। कटाई-छटाई वर्षा और बसंत ऋतु में की जाती है।

खुला हुआ स्थान जो कि जल के समीप होता है टॉपियरी बनाने के लिए उचित रहता है। हर कटाई-छटाई के पश्चात पौधों को नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक देने से पौधों की वृद्धि शीघ्रता से होती है।


(2) बौनाकरण या बॉनसाय ( Bonsai )

बड़े-बड़े वृक्षों को काट-छांट कर अत्यंत ही बौना रखने की कला को बौनाकरण या बॉनसाय कहते हैं। इस कला के अंतर्गत बरगद जैसे विशाल वृक्ष को 0.5 से 1.0 मी. ऊंचा बनाया जा सकता है। जापान में यह कला अधिक लोकप्रिय है।

इस कार्य हेतु वृक्ष गमले में या प्लेट में या अन्य सुविधा वाले पात्रों में उगाए जाते हैं। उनकी बाढ़ नियंत्रित रखने के लिए प्रति वर्ष उनकी जड़ों और शाखाओं की सावधानीपूर्वक काट-छांट की जाती है।

मुख्य जड़ व तना क्रमश: मोटा होता जाता है और परिपक्व हो जाता है, किंतु फैलता नहीं है। बौनाकरण की कला को घरों की सजावट के लिए उपयोग किया जाता है।

(3) मेहराव या परगोला ( pergola )

प्रवेश द्वार अन्य निर्गम या आगम स्थानों पर लोहे या लकड़ी का मेहराव बनाकर उस पर शोभायमान लताओं को चढ़ा देने की कला को मेहराव या परगोला कहते हैं। लताओं का चुनाव मेहराव के आकार, उसके स्थान तथा उद्देश्य के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

मेहराव का आकार इतना बड़ा अवश्य हो कि आवागमन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न ना हो। इसमें चढ़ाई गई लताओं की कटाई-छटाई नियमित एवं समय-समय पर की जानी चाहिए। लताऐं पर्णपाती ना होकर सदाबहार होनी चाहिए।

एडिलोकैलिम्ना, डेरिस, पाइरोस्टीजिया, वैनिस्टेरिया, पोइवेरिया आदि प्रमुख लताऐं इस उद्देश्य हेतु उपयुक्त होती है।

(4) फुहारा ( Fountain )

कृत्रिम रूप से उद्यानों में वर्षा की आभा उत्पन्न करने की तकनीक फुहारों द्वारा प्रदर्शित की जाती है। जल को विद्युत पंप द्वारा खींचकर उसे पाइप द्वारा महीन छिद्रों से बल के साथ बाहर फेंका जाता है, जिसके फलस्वरूप जल महीन कणों में विभक्त होकर फुहारा ( spray ) या वर्षा का दृश्य निर्मित करता है।

बल या ताकत के साथ जल फुहार में निकलने के कारण ऊपर तेजी से उठता है और धाराओं के रूप में नीचे गिरता है। वर्षा ऋतु स्वमेव लोकप्रिय होती है। उद्यान के आकार के अनुसार फुहारे अनेक प्रकार की सुंदर आकृतियों में बनाए जाते हैं।

जिनसे जल की फुहार विभिन्न कोण से निकाली जाती है। इन फुहारों को रंगीन विद्युत सज्जा से भी अलंकृत किया जाता है। वृंदावन उद्यान, मैसूर में फुहारों की उत्कृष्ट कला प्रदर्शित की गई है। फुहारों की संख्या व आकार उद्यानों के क्षेत्रफल पर निर्भर करती है।

(5) झरना या प्रपात ( water fall ) 

बड़े-बड़े अलंकृत उद्यानों में जल को ऊंचे स्थानों से क्रमबद्ध तरीके से नीचे गिराकर कृत्रिम रूप से झरना या प्रपात का दृश्य उपस्थित किया जाता है। ढलान वाली भूमि पर उद्यान बनाने में झरना या प्रपात की विशेष आभा दिखाई देती है।

लघु रुप में नदियों, नालों आदि का निर्माण भी कृत्रिम वातावरण द्वारा प्राकृतिक दृश्यों की नकल की जाती है। झरना या प्रपात का दृश्य बड़े उद्यानों में ही बनाया जा सकता है। उद्यानों में झरना या प्रपात होने से उद्यान की शोभा और भी बढ़ जाती है।


(6) जलाशय ( pond, tank, reservior )

जल से मानव को स्वाभाविक प्रेम होता है। उसकी अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के अलावा जल से शांति और स्फूर्ति भी प्राप्त होती है। यही कारण है कि बड़े-बड़े शहरों का विकास यथासंभव नदी के समीप ही हुआ है।

इस भावना का उपयोग भी निर्जन और शुष्क स्थल पर उद्यान में जलाशय चाहे वह छोटा हो या बड़ा तैयारकर विशेष आकर्षण उत्पन्न किया जाता है। जिस तरह उगते हुए या डूबते हुए सूर्य की आभा समुद्र के द्वारा विशेष आकर्षक हो जाती है,

उसी तरह जलाशय वृक्ष उगाने की छटा निखार देता है‌। वृक्षों की परछाइयां इन जलाशयों में विशेष आकर्षण पैदा करती हैं। जलाशयों में रंग-बिरंगे विद्युत उपकरण लगाकर जलाशयों की शोभा और अधिक बढ़ाई जा सकती है।

उद्यान विज्ञान से मिलते-जुलते कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1. अलंकृत बागवानी किसे कहते हैं?

उत्तर - अलंकृत बागवानी :- अलंकृत बागवानी उद्यान विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत सुंदर एवं आकर्षित करने वाले एकवर्षीय, दोवर्षीय एवं बहुवर्षीय पौधों को लगाया जाता है।

प्रश्न 2. अलंकृत उद्यान का मानव जीवन में क्या महत्व है?

उत्तर - अलंकृत उद्यान का मानव जीवन में अत्याधिक महत्व है। अलंकृत उद्यान का उपयोग मनुष्य अपने घरों की सजावट करने के लिए, मनोरंजन के लिए, तथा औषधी एवं व्यवसाय के रूप में करता है।

प्रश्न 3. एकवर्षीय पौधे किसे कहते हैं?

उत्तर - एकवर्षीय पौधे :- वे पौधे जो अंकुरण से लेकर पकने तक का अपना जीवन चक्र एक वर्ष या इससे भी कम समय में पूरा कर लेते हैं, एकवर्षीय पौधे कहलाते हैं।

प्रश्न 4. देवी-देवताओं का प्रतीक किन पौधों को माना जाता है?

उत्तर - देवी-देवताओं का प्रतीक निम्न पौधों को माना जाता है -

1. पीपल
2. कदम्ब
3. कचनार
4. बरगद आदि

प्रश्न 5. छोटे एवं बड़े वृक्षों को कितने मीटर की दूरी पर लगाना चाहिए?

उत्तर - छोटे एवं बड़े वृक्षों को निम्न मीटर की दूरी पर लगाना चाहिए -

1. छोटे पौधों को 5 से 6 मीटर की दूरी पर लगाना चाहिए।

2. बड़े वृक्षों को 10 से 12 मीटर की दूरी पर लगाना चाहिए।

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