फल तथा सब्जीयों के परिरक्षण के सिद्धांत General Principal of fruit and vegetable preservation

फल तथा सब्जीयों के परिरक्षण के सिद्धांत General Principal of fruit and vegetable preservation


स्वस्थ बने रहने के लिए जिन पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, वे सभी पोषक तत्व फल एवं सब्जियों में पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए स्वास्थ्य की रक्षा के लिए फल एवं सब्जियों का निरंतर सेवन करना जरूरी होता है।

अधिकांश फल एवं सब्जियां मौसमी होती हैं तथा मौसम बीत जाने पर इनका मिलना असम्भव हो जाता है। लेकिन परीक्षण विधियों को अपनाकर इन्हें वर्ष भर या इससे भी अधिक समय के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।


फल तथा सब्जी परिरक्षण के सिद्धांत General Principal of fruit and vegetable preservation

फल तथा सब्जियों को समयानुसार सुरक्षित रखने के लिए मुख्य रूप से दो सिद्धांतों का उपयोग किया जाता है जो निम्नानुसार हैं -

(1) अस्थायी ( अल्पकालीन ) परिरक्षण ( Temporary Preservation )

(2) स्थायी ( दीर्घकालीन ) परिरक्षण ( Permanent Preservation )

(1) अस्थायी ( अल्पकालीन ) परिरक्षण ( Temporary Preservation )


इस विधि के अनुसार सब्जी एवं फलों को केवल सीमित समय के लिए ही संरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए जा सकते हैं -


1. सफाई ( Cleaning )


फलों तथा सब्जियों को प्राप्त करने के पश्चात सड़े-गले तथा चोट खाये हुए दागी फलों एवं सब्जियों को अलग-अलग कर देते हैं। स्वच्छ फलों को सावधानीपूर्वक साफ पेटियों अथवा टोकरियों में भरते हैं। इस प्रकार फलों को अपेक्षाकृत अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।


2. कम तापक्रम ( Low temperature )


कम तापक्रम पर बैक्टीरिया शिथिल हो जाते हैं, अतः फलों तथा सब्जियों को ठीक अवस्था में अधिक समय तक रखा जा सकता है। बड़े पैमाने पर शीतगृहों में तथा घरेलू उपयोग के लिए फल और सब्जियों को फ्रिज में रखा जाता है।

3. अधिक तापक्रम ( High temperature )


सामान्य से अधिक तापक्रम करके बैक्टीरियाओं की क्रियाशीलता कम की जाती है। इस प्रकार खटास रहित फलों को अधिक ताप देकर अल्पकालीन परिरक्षण कर सकते हैं, जबकि खटास वाले फलों का स्थायी परिरक्षण किया जा सकता है।

4. नमी तथा हवा से बचाव रखना ( safety from air and moisture )


फलों को ठंडे शुष्क एवं नमी रहित वातावरण में रखने पर जीवाणुओं का अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है। इस प्रकार सूखे फलों तथा सब्जियों को वायु रहित डिब्बों में काफी दिनों तक रखा जा सकता है।

5. हल्के कीटाणुनाशक पदार्थों का प्रयोग ( use of light preservation )


फलों तथा सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए चीनी, सिरका, नमक, तेल व सोडियम बेंजोएट का प्रयोग लाभकारी रहता है। इससे फलों एवं सब्जियों को कम समय के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

(2) स्थायी ( दीर्घकालीन ) परिरक्षण ( Permanent Preservation )


इस विधि में सब्जी एवं फलों को अधिक दिनों के लिए परिरक्षण करते हैं। संरक्षित खाद्य पदार्थों में धीमी गति से रासायनिक परिवर्तन होते हैं। इसके अंतर्गत निम्नलिखित विधियों को अपनाया जाता है -


1. फलों एवं सब्जियों को सुखाना ( निर्जलीकरण ) ( Dehydration of fruit and vegetable )


पानी अथवा नमी की उपस्थिति में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं तथा पदार्थों को खराब कर देते हैं। अतः फल तथा सब्जियों के पानी को कम कर देने से उन्हें अपेक्षाकृत अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके लिए फल तथा सब्जियों को धूप अथवा मशीनों द्वारा सुखाया जाता है।

अंजीर, मुनक्का, किशमिश, छुहारे इसी विधि से सुखाए जाते हैं। मशीनों द्वारा सुखाने पर उनके रंग, गंध, व स्वाद में केवल मामूली परिवर्तन हो सकता है। धूप में सुखाना सबसे प्राचीन विधि है। गांवों में पोदीना, मेथी, चने का साग, ग्वार की फली तथा गोभी धूप में ही सुखायी जाती है। सब्जियों में 7-10% तथा फलों में 20-22% से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए।

2. चीनी द्वारा ( by sugar )


खाद्य पदार्थों को संरक्षित करने के लिए चीनी का प्रयोग बहुत पहले से ही होता चला आ रहा है। चीनी के गाढ़े घोल के कारण विपरीत परासरण होता है और बैक्टीरिया जीवित नहीं रह पाते हैं। इसके लिए लगभग 2/3 (66%) भाग से अधिक चीनी प्रयोग की जाती है। मुरब्बा, जैम, जैली आदि खाद्य पदार्थ चीनी के द्वारा ही अधिक समय तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

3. नमक द्वारा ( by salt )


नमक बैक्टीरियाओं के लिए प्राणघातक होता है। अतः खाद्य पदार्थों में 15% या इससे अधिक नमक मिलाकर फलों तथा सब्जियों का स्थायी परिरक्षण किया जा सकता है। नमक के द्वारा विभिन्न प्रकार के अचार काफी लंबे समय तक संरक्षित किए जा सकते हैं।

4. अधिक ताप द्वारा कीटाणुनाशक ( Sterilization by high temperature )


खाद्य पदार्थों को अधिक ताप देकर जीवाणुओं को नष्ट किया जाता है, जिससे ऐसे पदार्थ अधिक समय तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं, लेकिन इस विधि के प्रयोग करने से सब्जियों का स्वाद, रंग तथा विटामिन्स नष्ट हो जाते हैं।

5. रासायनिक पदार्थों द्वारा ( by chemical materials )


सब्जियों तथा फलों के स्थायी परिरक्षण के लिए रासायनिक पदार्थों का उपयोग भी किया जा सकता है, लेकिन इनका उपयोग केवल सीमित मात्रा में ही करना चाहिए जिससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव ना पड़े। प्रायः निम्नलिखित रासायनिक परिरक्षण के लिए प्रयोग करते हैं -

(अ) सोडियम बेंजोएट ( sodium benzoate )

इसको पानी में घोलने से बेन्जोइक अम्ल बनता है जो बैक्टीरियाओं की क्रियाशीलता को समाप्त कर देता है। खट्टे खाद्य पदार्थों को संरक्षित करने के लिए इसका प्रयोग अधिक लाभकारी होता है।

(ब) सोडियम मेटा-बाइ-सल्फेट अथवा पोटैशियम मेटा-बाइ-सल्फेट ( sodium metabisulphite or potassium metabisulphite )

इन रसायनों को पानी में घोलने पर सल्फर-डाइऑक्साइड गैस बनती है, जो बैक्टीरियाओं को अधिक प्रभावित करती है। इन रसायनों का प्रयोग भी खट्टे पदार्थों के स्थायी परिरक्षण के लिए करते हैं।

6. ऐसीटिक अम्ल द्वारा ( by acetic acid ) 


इसका उपयोग भी फलों एवं सब्जियों के स्थायी परिरक्षण के लिए किया जाता है। खाद्य पदार्थों में 2% ऐसीटिक अम्ल मिलाया जाता है। सिरका भी इस कार्य के लिए प्रयोग किया जाता है क्योंकि इसमें 5% तक ऐसीटिक अम्ल होता है। साधारणतः अचार व चटनी के लिए इसका प्रयोग करते हैं।

7. किण्वन द्वारा ( by fermentation )


बैक्टीरिया तथा एन्जाइम के द्वारा खाद्य पदार्थों में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट का विदारण ( किण्वीकरण ) होता है तथा इस क्रिया से प्राप्त पदार्थों के द्वारा खाद्य पदार्थों का स्थायी परिरक्षण हो जाता है। ये फरमेण्टेशन प्राय: निम्नलिखित प्रकार के होते हैं -

(अ) एल्कोहॉलिक फरमेण्टेशन ( Alcoholic fermentation )

जब यीस्ट ( खामीर ) द्वारा कार्बोहाइड्रेट का फरमेण्टेशन होता है तो एल्कोहॉल और कार्बन-डाइऑक्साइड गैस बनती है। एल्कोहॉल की उपस्थिति में जीवाणुओं की वृद्धि रुक जाती है। 18% या अधिक एल्कोहॉल की मात्रा होने पर खाद्य पदार्थों के जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।

(ब) ऐसीटिक फरमेण्टेशन (Acetic fermentation)

जब एल्कोहॉल पर ऐसीटिक एसिड जीवाणुओं की क्रिया होती है तो ऐसीटिक अम्ल बनता है जो खाद्य पदार्थों के स्थायी परिरक्षण के लिए सक्षम है।

(स) लैक्टिक फरमेण्टेशन (Lactic fermentation)

लैक्टिक अम्ल जीवाणुओं के द्वारा खाद्य पदार्थों का कार्बोहाइड्रेटलैक्टिक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है। दूध से दही इसी अम्ल की सहायता से ही बनता है। अनेक प्रकार के अचार भी इसी अम्ल से संरक्षित किए जाते हैं।


फल तथा सब्जी परिरक्षण से मिलते-जुलते कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. भोज्य पदार्थ जल्दी खराब हो जाते है इसका मुख्य कारण क्या है?

उत्तर - भोज्य पदार्थों के खराब होने का मुख्य कारण भोजन में उपस्थित सूक्ष्म जीवाणु, एंजाइम आदि के कारण खराब होते हैं। इसके अलावा कृमि, कीट तथा चूहों की उपस्थिति के कारण भी भोज्य पदार्थ खराब हो जाते हैं।

प्रश्न 2. कौन सी किरणों का उपयोग करके भोज्य पदार्थों का संरक्षण किया जा सकता है?

उत्तर - गामा एवं अल्ट्रावायलेट किरणों का उपयोग करके भोज्य पदार्थों का संरक्षण किया जा सकता है।

प्रश्न 3. फल एवं सब्जी परिरक्षण क्या है?

उत्तर - फल एवं सब्जी परिरक्षण - फल एवं सब्जी परिरक्षण उद्यान विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें विज्ञान के सिद्धांतों का उपयोग कर फल एवं सब्जी को खराब होने से बचाने तथा उनसे खाद्य पदार्थ बनाने की वैज्ञानिक विधि का उपयोग किया जाता है

प्रश्न 4. डिब्बाबन्दी ( canning ) से होने वाले लाभ लिखिए?

उत्तर - डिब्बाबन्दी ( canning ) से होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं -

1. डिब्बाबन्दी के द्वारा फलों को घर पर भी आसानी से परिरक्षित किया जा सकता है।

2. बोतलों को दुबारा भी प्रयोग में ला सकते हैं, जबकि डिब्बों को दुबारा प्रयोग में नहीं ला सकते हैं।

3. इसके अन्दर भरा हुआ पदार्थ आसानी से दिखाई देता है, जिससे ग्राहक आसानी से आकर्षित होते हैं।

प्रश्न 5. फल परिरक्षण में उपयोग होने वाला रसायन कौन सा है?

उत्तर - फल परिरक्षण में उपयोग होने वाला रसायन सोडियम बेंजोएट है।

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