फल तथा सब्जीयों के परिरक्षण की सीमाएँ Limitation of fruit and vegetables preservation

फल तथा सब्जीयों के परिरक्षण की सीमाएँ Limitation of fruit and vegetables preservation


फल तथा सब्जी परिरक्षण प्रौद्योगिकी के सामने सबसे बड़ी समस्या फलों तथा सब्जियों की तुड़ाई के बाद उचित ज्ञान के अभाव के कारण आती है।

फल तथा सब्जी परिरक्षण की सीमाएँ Limitation of fruit and vegetables preservation


फल तथा सब्जी परिरक्षण उद्योगों को निम्नलिखित समस्याओं से संघर्ष करना पड़ता है - 


(1) तुड़ाई व परिपक्व से संबंधित समस्याएँ

1. अधपके फलों को तोड़ना।

2. फलों में उपयुक्त परिपक्वन में कमी।

3. फलों के विकास एवं परिपक्वन में भिन्नता।

4. उपयुक्त वातावरण न होने के कारण फल व टमाटर के पकने में कठिनाइयां।

5. टमाटर में एक समान रंग का विकास ना होना।

6. फलों की विभिन्न किस्मों की तुड़ाई हेतु परिपक्वन संबंधी उचित मानक का अभाव।

7. विपणन संबंधी ( क्रय और विक्रय अनुरोध ) प्रभाव, जिससे उत्पादक फल की परिपक्वता की परवाह किए बिना ही उन्हें भी तोड़कर बाजार में बेच देता है।

(2) कच्चे माल से संबंधित समस्याएं 

1. वांछित गुणवत्ता वाले फलों की कमी।

2. डिब्बा बंद करने हेतु उचित किस्म के फलों की कमी।

3. फलों के आकार एक समान ना होना।

4. कच्चे फल।

5. स्थानीय मंडी में उपलब्ध टमाटरों में उचित रंग का न होना और घुलनशील ठोस पदार्थ की मात्रा का कम होना।

6. अनानास में अनुकूल आमाप का न होना, जिससे व्यर्थ पदार्थ का अधिक निकलना और अधिक अम्लता ( 2% ) होना।

7. अनानास का कम या अधिक पका हुआ होना।

8. आम में स्पंज के समान ऊतकों का होना।

9. आम का स्टोन वीविल ( गुठली में घुन ) द्वारा ग्रस्त होना।

(3) परिवहन और भंडारण से संबंधित समस्याएं

1. लंबी दूरी के गमन के दौरान क्षति।

2. उपयुक्त परिवहन का अभाव ( परिवहन का अन्दर से न तो उपयुक्त हवादार होना और न ही तापमान व अपेक्षिक आर्द्रता पर नियंत्रण होना )

3. परिवहन सुविधा में कमी, विशेषकर फलों के मौसम में।

4. कच्चे माल की मौसमी प्रकृति के कारण भंडारण में कठिनाइयां ( शीत भंडार ग्रह की कमी, यदि उपलब्ध है तो बहुत ऊंची कीमत पर )

(4) विपणन और आर्थिकी से संबंधित समस्याएं

1. एक बहुत बड़ी संख्या में मध्यस्थ लोग विपणन सेवा में संलग्न रहते हैं, परंतु ये कच्चे माल की कीमत को अधिक बढ़ा देते हैं।

2. कच्चे माल की परिपक्वता और कीमत पर उचित नियंत्रण का न होना।

3. उत्पादक और संसाधनों को उचित आर्थिक सहायता का अभाव।

(5) तकनीकी से संबंधित समस्याएं

1. जैम की बोतलों को सील बंद करने के बाद हवा के बुलबुले।

2. कृत्रिम रंग व सुवास की एक समानता में कमी।

3. नारंगी स्क्वाश में भंडारण के दौरान अपवर्णता।

4. नारंगी स्क्वाश में गूदा का अलग हो जाना।

5. टमाटर कैचप में " ब्लैक नेक "

6. डिब्बाबंद पपीता में संक्षारण।

7. डिब्बाबंद आम ( तोतापरी ) के गूदे का काला होना।

8. टोमेटो प्युरी की शीघ्र खराब होना।

(6) नीति से संबंधित समस्याएं

कभी-कभी सरकारी नीतियां कृषकों तथा संसाधकों को प्रभावित करती हैं।

फल तथा फल पदार्थों के खराब होने के कारण ( Causes of decay of fruits and fruits products )


प्रायः देखा जाता है कि सब्जियां, फल तथा उनसे बनाये गए खाद्य पदार्थ अधिक लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह पाते हैं। उनके रंग, सुगंध, स्वाद एवं विटामिन सहित सभी पोषक तत्वों में कमी आने लगती है। उनमें फफूंदी लगने लगती है और धीरे-धीरे वे सड़ने-गलने लगते हैं।

सब्जियां, फल एवं उनसे बनाए गए खाद्य पदार्थ निम्नलिखित कारकों के कारण सड़-गल कर खराब हो जाते हैं - 


1. फफूंदी अथवा कारक ( Fungi )

फफूंदी खाद्य पदार्थों पर नमी एवं गर्मी पाकर लग जाती है। प्रायः वर्षा ऋतु में खाद्य पदार्थों पर सफेद, काले, नीले एवं हरे रंग का रुई जैसा पदार्थ उगता दिखाई देता है, यह फफूंदी ही है, जो इन खाद्य पदार्थों को नष्ट करती है।

फफूंदी साधारण अम्लीय माध्यम में पनपती है। फफूंदी लगे हुए भाग को काटकर अलग कर देना चाहिए तथा पदार्थों को 20-25 मिनट तक 160°-165° फा. तापक्रम पर गर्म करने से खमीर को नष्ट किया जा सकता है। खमीर के द्वारा खाद्य पदार्थों का रंग व स्वाद खराब हो जाता है।
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