खरपतवार ( kharpatwar ) क्या है इसकी विशेषताएँ, अर्थ और लाभ - हानियां

खरपतवार ( kharpatwar ) क्या है इसकी विशेषताएँ, अर्थ और लाभ - हानियां


खरपतवार क्या है

खरपतवार मुख्य फसल के साथ बिना उगाये उग आते हैं और फसलों को हानि पहुंचाते हैं। किसान खरपतवारो को नष्ट करने के लिए खेत की जुताई, फसल की निराई - गुड़ाई करता है।

फिर भी ये कई बर्षो तक बिना नष्ट हुए भूमि में अपनी जगह बनाये रखते हैं। और उचित समय आने पर फिर से उग आते हैं।


खरपतवार क्या है इसके उद्देश्य,अर्थ और लाभ - हानि What is weed, its purpose, meaning and profit - loss

खरपतवार किसे कहते हैं

खरपतवार वे अवांछित पौधे है जो मुख्य फसल के साथ बिना बोए स्वयं ही उग आते हैं और मुख्य फसल को विभिन्न रूपों से हानि पहुंचाते हैं। जिससे उपज बहुत कम प्राप्त होती है। ये पौधे खरपतवार ( kharpatwar ) कहलाते हैं।

खरपतवार के उदाहरण - गेहूं की फसल में उगने वाला जंगली जई के पौधे आदि।


खरपतवार का अर्थ हिंन्दी में

खरपतवार वे अवांछित पौधे हैं जो किसी स्थान पर बिना वोये उग आते हैं और जिनकी उपस्थिति किसानों को लाभ की तुलना में हानिकारक अधिक होती है।

खेती में खरपतवारों से हानि शुरू से ही एक समस्या रही है।
शुरू में खेती में कम लागत के कारण इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं देता था,लेकिन आज के समय में बिना खरपतवार नियंत्रण के खेती करना असंभव है।

खरपतवार कृषि क्रिया में बाधा उत्पन्न करने के साथ-साथ फसल की उपज में कमी, उससे मिलने वाले लाभ तथा उसकी गुणवत्ता को अत्यधिक प्रभावित करते हैं।


खरपतवार की परिभाषा 

(1) खरपतवार एक ऐसा पौधा है जो खेतों में इतनी अधिक मात्रा में उगता है कि अधिक महत्वपूर्ण पोषक गुणों वाले दूसरे पौधों की बढ़वार को रोक देता है - ब्रैन्कले के अनुसार

(2) खरपतवार पौधों की ऐसी जाती है जो खेतों में अवांछित रूप से उगती है। यह प्रायः प्रचुरता से उगने वाली तथा दीर्घ स्थाई है और कृषि के कार्यों में बाधा डालकर श्रम की लागत को बढ़ाती है तथा उपज की मात्रा कम करती है - राबिन्स के अनुसार

(3) खरपतवार वे पौधे हैं जो सही स्थान पर नहीं उगते हैं - वील के अनुसार

(4) खरपतवार वे पौधे हैं जिनकी क्षमता अच्छाई की अपेक्षा नुकसान कि कहीं अधिक होती है - पीटर के अनुसार

(5) खरपतवारों की कोई प्रजाति नहीं होती है, बल्कि जहां उसे उगाने की जरूरत नहीं होती वहां पर उग आते हैं और नुकसानदायक होते हैं - चंद्रिका ठाकुर के अनुसार

सभी परिभाषाओं के आधार पर यही कहा जा सकता है कि खरपतवार एक अवांछित पौधे हैं जो बिना वोये खेतों अथवा अन्य स्थानों पर उग आते हैं। बहुत तेजी से बढ़ते तथा फूलते - फलते हैं

और मुख्य फसल के साथ उगकर फसलों की उपज कम करते हैं। खरपतवारों की रोकथाम के लिए किसानों को अधिक खर्च करना पड़ता है। जिससे किसानों को अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है।


खरपतवार की विशेषताएं क्या है 

(1) खरपतवारों में पुष्पन शीघ्र, बीजों की मात्रा अधिक एवं प्रस्फुटन फसलों के पूर्व होता है।इसलिए खरपतवारों के बीज फसलों के पकने के पूर्व में ही पककर खेतों में बिखर कर अगले मौसम में फसलों से पहले अंकुरित हो जाते हैं।

(2) खरपतवारों की जड़े शीघ्रता से एवं अधिक गहराई तक जाकर पोषक पदार्थों का चूसन करती हैं।

(3) खरपतवारों के बीजों का अंकुरण बहुत जल्दी होता है, बीजंकुर शीघ्रता से बढ़ते हैं इसके अलावा खरपतवारों के बीजों की अंकुरण शक्ति बहुत समय तक बनी रहती है।

सस्य क्रिया के समय भूमिगत हुए कई खरपतवारों के बीजों की जीवन क्षमता 70 वर्षों तक बनी रहती है जो उचित वातावरण मिलने पर पुनः अंकुरित हो जाती है।

(4) खरपतवारों को यदि अपरिपक्व अवस्था में काट दिया जाए तो भी इनके बीजों की अंकुरण क्षमता शत - प्रतिशत बनी रहती है।

जैसे - जंगली पालक, चीक बीड इत्यादि।

(5) खरपतवारों की पत्तियों में रक्षा आवरण जैसे - सख्त बाल, चिपचिपा पदार्थ, कांटे आदि पाए जाते हैं। इसके अलावा इनमें क्रियाशील रंध्रकूपो की संख्या भी अधिक मात्रा में पाई जाती है।

(6) मोथा, हिरनखुरी आदि खरपतवारों को यदि बीज बनने से पहले भी नष्ट कर दिया जाए तो ये अपने अन्य वनस्पतिक अंगों द्वारा वृद्धि कर लेते हैं।

(7) खरपतवारों के बीजों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक फैलाव करने हेतु पंख, बाल, कांटे, हुक इत्यादि पाए जाते हैं। जैसे - जंगली जई, मकोय, सामाघास, बिच्छूघास इत्यादि।

(8) खरपतवारों के बीज एवं फसलों के बीज एक ही आकार प्रकार के होने के कारण खरपतवारो के बीजों को अलग करना असंभव होता है।

(9) खरपतवारों के बीजों में जलवायु विषमताओं को सहन करने की क्षमता अधिक होती है।

(10) खरपतवार बंजर भूमि और अनेक प्रकार की भूमियों में आसानी से उग आते हैं।

(11) खरपतवारों के पौधों में रोग कीट नहीं लगते हैं और यदि लगते भी है तो इनमें सहन करने की क्षमता फसलों से अधिक होती है।

(12) खरपतवारों को पानी की आवश्यकता बहुत कम होती है। ये कम पानी में भी विकसित हो जाते हैं।

(13) खरपतवारों के बीजों को भूमि की तैयारी आवश्यक नहीं है यह स्वतः उग आते हैं।

(14) खरपतवारों की जड़े भूमि में शीघ्र विकसित होती है।

(15) खरपतवारों में फूल फल शीघ्र आते हैं, इनके फलों में बीज अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इनके फल मुख्य फसल से जल्दी पक जाते हैं।

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खरपतवारों से होने वाले लाभ

खरपतवारो से अनेक हानियां होने के बावजूद भी खरपतवारों से लाभ भी मिलते हैं जो निम्नलिखित हैं - 

(1) खरपतवारों की जड़ें भूमि में अधिक गहराई तक जाकर भूमि के कणों को बांधे रखती हैं जिससे मृदा कटाव को रोका जा सकता है।

(2) कुछ खरपतवार औषधि के रूप में प्रयोग किए जाते हैं जैसे - सत्यानाशी का प्रयोग चर्म रोग में किया जाता है।

(3) खरपतवार जानवरों के लिए हरे चारे के रूप में प्रयोग किए जाते हैं। इससे जानवरों को वर्ष भर हरा चारा मिलता रहता है। जैसे - दूब, कासनी आदि।

(4) कुछ खरपतवार खाने में शाक भाजी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं जैसे - बथुआ, चौलाई आदि।

(5) कुछ खरपतवारों का प्रयोग सजावट के लिए किया जाता है। जैसे - दूब घास आदि।

(6) खरपतवारो का प्रयोग हरी खाद बनाने में किया जाता है। जैसे- जलकुंभी आदि

(7) खरपतवार भूमि में नमी रोकने के लिए मल्च (Mulch) का कार्य करते हैं।

(8) खरपतवार पानी के तेज बहाव को कम करते हैं।


खरपतवारों से होने वाली हानियां

खरपतवारों से अनेक हानियां होती हैं जो निम्नलिखित हैं -

(1) खरपतवार मृदा जल को चूसते हैं जिससे मृदा में जल की नमी कम हो जाती है।

(2) मृदा में अनेक पोषक तत्व पाए जाते हैं जो मुख्य फसल के पौधों के लिए उपयोगी होते हैं। लेकिन खरपतवारों द्वारा 7-20% तक पोषक तत्व ग्रहण कर लिए जाते हैं।

(3) खरपतवार मुख्य फसल के साथ खेतों में उग आते हैं जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।इससे 5-50% तक पैदावार में कमी आ जाती है।

(4) खरपतवारों का फसलों के गुणों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।विभिन्न फसलों के दानों से तेल एवं प्रोटीन की प्रतिशत मात्रा कम हो जाती है।

गन्ने के पौधों में चीनी की प्रतिशत मात्रा कम हो जाती है। सभी कारणों से फसल की कीमत गिर जाती है।

(5) खरपतवार रोग एवं कीटों को आवास प्रदान करते हैं। जिससे रोग एवं कीट खेतों में ही बने रहते हैं और यह कीट और रोग फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।

(6) खरपतवार नष्ट करने में अधिक खर्च लगता है और और पैदावार भी कम होती है जिससे किसान की आय कम हो जाती है।

(7) खरपतवारों के खेतों में अधिक उगने से भूमि के मूल्यों मैं गिरावट आ जाती है। जिसका सीधा प्रभाव किसान पर पड़ता है।

(8) खरपतवार मनुष्यों के लिए हानिकारक होते हैं क्योंकि खरपतवारों से त्वचा में खुजली (गाजर घास के परागकण से), चिड़चिड़ापन (जंगली मटर के सेवन से) आदि रोग व किसी खरपतवार के ग्रहण कर लेने से मनुष्यों की मृत्यु भी हो सकती है।

(9) खरपतवार भूमि की उपजाऊ शक्ति को नष्ट कर देते हैं क्योंकि कुछ खरपतवार अपनी जड़ों द्वारा विषैले पदार्थ छोड़ते हैं। जो आगे वोई जाने वाली फसलों के लिए बहुत हानिकारक होते हैं।

(10) खरपतवार कृषि यंत्रों एवं मशीनों व पशुओं की आयु को कम कर देते हैं।
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