फसल किसे कहते है यह कितने प्रकार की होती है इनका वर्गीकरण एवं महत्त्व

फसल किसे कहते है यह कितने प्रकार की होती है इनका वर्गीकरण एवं महत्त्व


फसल क्या है (फसल की परिभाषा) - 

एक ही आकार तथा प्रकार के पौधों का वह समूह जो किसी क्षेत्र विशेष में किसी विशेष समय पर आर्थिक लाभ के लिए उगाया जाता है, फसल कहलाता है।


फसल क्या है एवं इनके प्रकार Crop and types of crops, फसल किसे कहते है यह कितने प्रकार की होती है इनका वर्गीकरण एवं महत्त्व

फसलों के प्रकार - 

ऋतुओं के आधार पर फसलों को तीन भागों में बांटा गया है -

(1) खरीफ की फसलें अथवा वर्षाकालीन फसलें -

इनके जमाव व पकने के समय अधिक तापक्रम व बढ़वार के लिए अधिक आर्द्रता की आवश्यकता होती है। ये मानसून आने पर प्रायः जून-जुलाई में बोई जाती हैं। जैसे - बाजरा, ज्वार, अरहर, मक्का, कपास, मूंगफली, तिल, उड़द, मूंग आदि।

(2) रबी की फसलें अथवा शरदकालीन फसलें - 

इनकी बढ़वार के लिए कम तापक्रम तथा जमाव व पकने के लिए कुछ अधिक तापक्रम तथा शुष्क जलवायु या कम आर्द्रता की आवश्यकता होती है। इन फसलों की बुवाई प्रायः अक्टूबर-नवंबर में की जाती है। जैसे - गेहूं, जौ, चना, मटर, बरसीम, आलू आदि।

(3) जायद की फसलें अथवा ग्रीष्मकालीन फसलें -

इन फसलों में अधिक ताप व तेज गर्म व शुष्क हवा को सहन करने की क्षमता होती है। इनकी बुबाई फरवरी से मई तक की जाती है। जैसे - खरबूज, तरबूज, तंबाकू, करेला, ककड़ी, टिंडा, लौकी आदि।


मानव जीवन में फसलों का महत्व

मानव जीवन में फसलों का महत्व अत्यधिक है। क्योंकि फसलों के बिना मानव जीवन अधूरा है। मनुष्य के लिए फसलों से अनाज प्राप्त होते हैं जिस अनाज का प्रयोग करके मनुष्य भोजन पकाकर अपना पेट भरते हैं।

मनुष्य इस अनाज को खाकर ही जीवित रहते हैं। भारत में जितनी मात्रा में फसलें बोई जाती हैं उन फसलों में से 90% फसलें मनुष्य के लिए अत्यधिक उपयोगी होती हैं। मनुष्य इन फसलों का उपयोग करके अपने शरीर की जरूरतों को पूरा करता है।

फसलों के कारण ही देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है क्योंकि जिस देश में फसल उत्पादन अत्यधिक मात्रा में होती है उस देश की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहती है।
ग्रामीण लोग फसल उत्पादन करके ही अपना जीवन यापन करते हैं।

ग्रामीण लोगों के लिए फसल ही सब कुछ होता है क्योंकि वे फसल उत्पादन के लिए दिन रात मेहनत करते हैं। किसान की आर्थिक स्थिति फसल के कारण ही मजबूत होती है।
ग्रामीण लोग अनाज को "अन्य देवता" के नाम से भी पुकारते हैं।

भारत के लगभग 50% लोग खेती करके ही अपना जीवन यापन करते हैं। जब कोई व्यक्ति बीमार हो जाता है तो उसका शरीर कमजोर पड़ जाता है। तब डॉक्टर उसे फलों को खाने की सलाह देता है और ये फल हमें फसलों द्वारा ही प्राप्त होते हैं। इसलिए फसलों का विश्व में अत्यधिक महत्व है।

प्राचीन काल से ही मनुष्य के जीवन में फसलों का अत्यधिक महत्व रहा है क्योंकि हमारे बड़े बुजुर्ग पहले से ही खेती करके अपना जीवन यापन करते थे। वे कड़ी मेहनत करके फसल उत्पादन करते थे। इसलिए मनुष्य के जीवन में फसलों का बड़ा महत्व है।


भारत में अत्यधिक मात्रा में बोई जाने वाली फसलें 

भारत में ऋतुओं के आधार पर फसलों को तीन भागों में बांटा गया है। खरीफ की फसलें, रवि की फसलें और जायद की फसलें। भारत के किसानों का जीवन यापन इन तीन ऋतुओं की फसलों पर निर्भर रहता है।

रवि की फसल में - चना, गेहूं, जौ, बरसीम, मटर, आलू, मसूर, तंबाकू, जई आदि बोई जाती है। भारत में रबी की फसलें सर्दी में बोई जाती हैं क्योंकि चना, मटर, गेहूं आदि फसलों को ठंडे मौसम की आवश्यकता होती है।

खरीफ की फसल में - सोयाबीन, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, मक्का, धान, बाजरा, कपास, अरहर, जूट, सनई, गन्ना ,भिंडी आदि फसलें बोई जाती हैं। भारत में खरीफ की फसल बरसात में बोई जाती है।

क्योंकि खरीफ की फसलों को अत्यधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। यदि खरीफ की फसलों को आवश्यकतानुसार पानी नहीं मिल पाता है तो उत्पादन में कमी आ जाती है।

भारत में जायद की फसलों में - तरबूज, ककड़ी, कद्दू, खरबूजा, लौकी, खीरा, तोरई, मूंग, मिर्च, टमाटर आदि फसलें बोई जाती हैं। यह फसलें सर्दी खत्म होते ही बोई जाती है।इन फसलों के द्वारा मनुष्य की आय में वृद्धि होती है।


फसलों का वर्गीकरण - 

फसलों को निम्न वर्गों में विभाजित किया गया है -

(1) दलहनी फसलें - इन फसलों का प्रयोग दाल के रूप में किया जाता है । इन फसलों के दानों में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाई जाती है। ये फसलें लग्युमिनेसी कुल के अंतर्गत आती है। जैसे - चना, मटर, मसूर, सोयाबीन आदि।

(2) अनाज वाली फसलें - इन फसलों को अनाज प्राप्त करने के उद्देश्य से उगाया जाता है।इन फसलों के दानों को अनाज के रूप में तथा वनस्पतिक अंग को पशुओं के भोजन के रूप में उपयोग में लाया जाता है। जैसे - मक्का, धान, ज्वार, बाजरा, गेहूं आदि

(3) रेशे वाली फसलें - इन फसलों को रेशा प्राप्त करने के उद्देश्य से उगाया जाता है। जैसे - कपास, पटसन, जूट, सनई आदि।

(4) तिलहनी फसलें - इन फसलों को तेल प्राप्त करने के उद्देश्य से उगाया जाता है। इन फसलों के बीजों से तेल निकाला जाता है। जैसे - सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, अरंडी आदि।

(5) शाकभाजी वाली फसलें - इस वर्ग की फसलों के पौधों के सभी भागों को शाकभाजी (सब्जी) के रूप में उपयोग किया जाता है। जैसे - आलू, टमाटर, मूली, गोभी, बैगन, भिंडी आदि।

(6) मसाले वाली फसलें - इस वर्ग की फसलों को खाने में स्वाद - सुगंध आदि लाने के उद्देश्य से बोया जाता है । जैसे -  जीरा, धनिया, अजवाइन, इलायची, दालचीनी, तेजपात आदि।

(7) औषधीय फसलें - कुछ प्रकार के पौधों में विशेष रुप से औषधीय गुण पाए जाते हैं इसलिए इन फसलों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। जैसे - नीम, तुलसी, मेंथा, अदरक, हल्दी, पुदीना आदि।

(8) चारे वाली फसलें - इन फसलों को जानवरों के लिए हरे चारे के लिए उगाया जाता है। जैसे - मक्का, ज्वार, बाजरा, लोबिया, बरसीम आदि।

(9) शर्करा वाली फसलें - इन फसलों को चीनी प्राप्त करने के उद्देश्य से उगाया जाता है। चीनी बनाने के लिए दो प्रमुख फसलें - गन्ना, चुकंदर

(10) फल वाली फसलें - इनको वृक्षों के रूप में उगाया जाता है जो बाद में फल देते हैं। जैसे - आम, संतरा, केला, अमरूद, सेब ,अंगूर आदि।

(11) पेय पदार्थ वाली फसलें - इन फसलों को पेय पदार्थ प्राप्त करने के उद्देश्य से उगाया जाता है। आजकल पेय पदार्थ का उपयोग अत्यधिक मात्रा में किया जाता है। जैसे - कॉफी, चाय, कहवा, कोको आदि।

(12) जड़ तथा कंन्द वाली फसलें - इस वर्ग की फसलों के जड़ें तथा तना खाने में प्रयोग किए जाते हैं। जैसे - चुकंदर, मूली, गाजर, शलजम आदि।

(13) उत्तेजक वाली फसलें - इस वर्ग की फसलों के सेवन करने से मनुष्य के शरीर में उत्तेजना उत्पन्न हो जाती है। जैसे - भांग, गांजास तंबाकू आदि।

फसल crops से मिलते जुलते कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1. फसल-उत्पादन के महत्व लिखिए?

उत्तर - फसल-उत्पादन के महत्व निम्नलिखित है -

1. फसल-उत्पादन से किसानों की आय में वृद्धि होती है।

2. फसल-उत्पादन से पूरे विश्व का पालन पोषण होता है।

3. फसल-उत्पादन से देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होता है।

4. फसल-उत्पादन से ही मनुष्य को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति जैसे - अनाज, तेल, सब्जियां आदि प्राप्त होते हैं।

5. फसल-उत्पादन के द्वारा भूमि का जल स्तर काफी हद तक बढ़ता है।

6. भूमि बंजर नहीं होती है, भूमि की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है।

7. फसल-उत्पादन से प्राप्त पैदावार का विदेशों में व्यापार करने से विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।

8. भारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत में प्राचीन काल से ही खेती होती चली आ रही है। इसलिए भारत में अधिकतर लोग खेती पर ही निर्भर होते हैं।

9. फसल-उत्पादन का मानव जीवन में अत्यधिक महत्व है, क्योंकि फसलों के द्वारा ही हमें अनाज, सब्जियां लेल,   प्राप्त होते हैं जिसका प्रयोग करके हम अपना पालन पोषण ( भोजन के रूप में ) करते हैं।

10. फसल-उत्पादन से पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता है, अतः पर्यावरण साफ एवं स्वच्छ रहता है।

प्रश्न 2. खरीफ की फसलों के उदाहरण लिखिए?

उत्तर - खरीफ की फसलों के उदाहरण निम्नलिखित है -

1. धान
2. सोयाबीन
3. उड़द
4. मूंग
5. मूंगफली
6. तिल
7. बाजरा
8. ज्वार
9. अरहर
10. मक्का आदि।

प्रश्न 3. अनाज वाली फसलें क्या है? इनके उदाहरण लिखिए।

उत्तर - वे फसलें जिनके दानों का उपयोग अनाज ( पोषण ) के रूप में तथा वानस्पतिक भाग का प्रयोग जानवरों के चारे के रूप में किया जाता है। अनाज वाली फसलें कहलाती है।
यह फसलें ग्रेमनी कुल के अंतर्गत आती हैं।

अनाज वाली फसलों के उदाहरण निम्नलिखित हैं - 

1. गेहूं
2. मक्का
3. धान
4. बाजरा
5. ज्वार आदि।

प्रश्न 4. फसल का अर्थ क्या है?

उत्तर - एक ही आकार तथा एक ही प्रकार के पौधों को किसी क्षेत्र विशेष में किसी विशेष समय पर उगाना, जिससे हमें अनाज की प्राप्त हो सके तथा आर्थिक लाभ हो सके, फसल कहलाता है।

प्रश्न 5. नगदी फसल किसे कहते हैं उदाहरण सहित समझाइए?

उत्तर - वे फसलें जिनका उत्पादन व्यापार करने के उद्देश्य से किया जाता है तथा जिन फसलों को रोज बैचकर नगदी आय प्राप्त होती है। नगदी फसलें कहलाती हैं।

नगदी फसलों के उदाहरण निम्नलिखित है -

1. कपास
2. गन्ना
3. तम्बाकू
4. जूट आदि।‍

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